टिप्पणियों का सिलसिला अब ख़त्म होने को है |दो -चार और हैं ,इन्हें भी निपटा लेते हैं |
27 -11 -14
मृणाल पाण्डेय की कहानियों की किताब अकेडमी की लाइब्रेरी से लाई थी |अब तक एक पसंद आयी -शरण्य की ओर |बहुत क्लिष्ट लिखती हैं |
14-1 -15
विनोद शुक्ल की कहानियों की किताब महाविद्यालय लायी थी |उनका स्टाइल सरल ,satirical तथा जिंदगी के भीतर गुंथा हुआ सा है |जिंदगी के ब्योरे देते -देते read between the lines की गुंजाईश बहुत है |कहे हुए से अधिक अनकहा असरदार है |
12 -3 -15
अकेडमी में शर्मीला वोहरा जालान की कहानी फिनिक्स पढ़ी |अच्छी लगी |
8 -7 -15
फेसबुक पर प्रभात जी की वाल पर शाह की कंजरी पढ़ी तो अमृता के सधेपन और भाषा ने तुरंत खींच लिया |नेट पर और ढूंढा तो गद्य कोष में कई रचनाएँ दिखीं |रसीदी टिकट इत्यादि |साहिर के साथ उनके प्रेम की बातें ,कविताएँ इत्यादि |
अब उनके निबंधों और कहानियों की एक किताब लाई |तो अब पूरा पढ़ा है |इनके भीतर एक आग सी है |अमृता के युग में आम जनों का जीवन देखे तो बड़ी बेचारगी ,एक चक्कर में गति करते हुए लोगों का जड़ जीवन है |उनका युग आज़ादी की आग से धधकता हुआ युग था ,पर आश्चर्य है कि उन्होंने अपना रास्ता व्यक्तिगत स्वतंत्रता का चुना |वे नारी की स्वतंत्रता और प्रेम के अधिकार की बात अपने साहित्य में कहती हैं |
in between comments -एक जगह अमृता ने कहा है की मेरे साहित्य का हश्र वही होगा जो नाजायज बच्चों का होता है | क्यों ?
ऐसा क्यों कहा होगा अमृता ने |
अगर हम उनके लेखन और उन पर लिखे हुए लेखन को पढ़ें (बल्कि जरुरत ही नहीं ,अमृता ने खुद ऐसे हवाले अपनी आत्मकथा में दे दिए हैं ) ,तो उनकी इस बात के मर्म को समझना मुश्किल नहीं है |उन्होंने लगभग 25 साल के बाद अपनी शादी तोड़ी |जिसे चाहा ,उसका साथ भी नहीं मिला |पर उनमें एक आग थी |समाज की सड़ी -गली रिवायतें न मानने की आग |
पर इसकी कीमत चुकानी पड़ती है |अमृता की आग भी आखिर विस्फोटक होकर उसे ही लील गयी ,और उसका जीवन एक राख बन कर रह गया |पर अमृता हारी नहीं |वह चलती रही |और चलने की निरंतरता ने आखिर उसे इल्मियत (ज्ञान )के महत्त्व से परिचित कराया |उसकी आवाज़ स्वतंत्रता की ,विद्रोह के साहस की आवाज़ बन गयी |अपनी लकीर ,अपनी किस्मत खुद लिखने वाली |
पर्सनली कहूँ तो मुझे इनके विषयों से असहमति हो सकती है ,पर इनका लिटरेरी टेस्ट बहुत बढ़िया है | i really liked her style and taste .
30 -7-15
चन्द्रकिरण सोनेरेक्सा की कहानियां एक चक्र में घूमते लोगों की कहानियां हैं |बचपन ,जवानी ,शादी ,काम -धंधा ,बच्चे ,मरण का चक्र |
इनके पात्र सवाल नहीं करते |अपने यथार्थ को देखते नहीं ,बस ,अनवरत परिस्थितिओं के अनुरूप हिचकोले खाते हुए, बहते चले जाते हैं ;छीजते ,टूटते ,बूढ़े होते ,ख़त्म होते चले जाते हैं |
इनकी कहानियों का सबसे विलक्षण तत्व है -इनकी भाषा |
23-9-15
विमल पाण्डेय की कहानी उत्तर प्रदेश की खिड़की पढ़ी |अच्छी थी |नायक की तीन दुनियाएं है -एक घर की ,एक वर्कप्लेस की ,एक उसके प्यार की |इन दुनियां के कांफ्लिक्ट्स की |फलक बहुत बड़ा रखा है |खासकर राजनीति को जबरदस्ती घुसेड़ा है |हो सकता है ,यह भाव हो कि हमारी दुर्दशा का कारण राजनीति है |भाषा अच्छी थी |satirical ,hilarious ,एकदम समझ में आने वाली |
शीषक खासा व्यंजक बन गया है | उत्तर प्रदेश की झांकी (अर्थात खिड़की )दिखाती एक उम्दा कहानी |
हरे प्रकाश उपाध्याय की नाच पढ़ी |कम शब्दों में एक पर्टिकुलर टाइप के लोगों की पर्टिकुलर टाइप की मानसिकता को अच्छा उकेरा है |
27 -11 -14
मृणाल पाण्डेय की कहानियों की किताब अकेडमी की लाइब्रेरी से लाई थी |अब तक एक पसंद आयी -शरण्य की ओर |बहुत क्लिष्ट लिखती हैं |
14-1 -15
- मृदुला गर्ग को पढ़ा |ठीक था |लाइट हैं |
- अशोक सकेसरिया की कहानी मोटर पार्ट्स का एजेंट पढ़ी ,अच्छी लगी |
- विनोद शुक्ल की कहानी रुपये अच्छी लगी |
- मृणाल की और भी कहानियां अच्छी लगीं |सुर् जी ,रूबी .........बहुत क्लिष्ट हैं |
विनोद शुक्ल की कहानियों की किताब महाविद्यालय लायी थी |उनका स्टाइल सरल ,satirical तथा जिंदगी के भीतर गुंथा हुआ सा है |जिंदगी के ब्योरे देते -देते read between the lines की गुंजाईश बहुत है |कहे हुए से अधिक अनकहा असरदार है |
12 -3 -15
अकेडमी में शर्मीला वोहरा जालान की कहानी फिनिक्स पढ़ी |अच्छी लगी |
8 -7 -15
फेसबुक पर प्रभात जी की वाल पर शाह की कंजरी पढ़ी तो अमृता के सधेपन और भाषा ने तुरंत खींच लिया |नेट पर और ढूंढा तो गद्य कोष में कई रचनाएँ दिखीं |रसीदी टिकट इत्यादि |साहिर के साथ उनके प्रेम की बातें ,कविताएँ इत्यादि |
अब उनके निबंधों और कहानियों की एक किताब लाई |तो अब पूरा पढ़ा है |इनके भीतर एक आग सी है |अमृता के युग में आम जनों का जीवन देखे तो बड़ी बेचारगी ,एक चक्कर में गति करते हुए लोगों का जड़ जीवन है |उनका युग आज़ादी की आग से धधकता हुआ युग था ,पर आश्चर्य है कि उन्होंने अपना रास्ता व्यक्तिगत स्वतंत्रता का चुना |वे नारी की स्वतंत्रता और प्रेम के अधिकार की बात अपने साहित्य में कहती हैं |
in between comments -एक जगह अमृता ने कहा है की मेरे साहित्य का हश्र वही होगा जो नाजायज बच्चों का होता है | क्यों ?
ऐसा क्यों कहा होगा अमृता ने |
अगर हम उनके लेखन और उन पर लिखे हुए लेखन को पढ़ें (बल्कि जरुरत ही नहीं ,अमृता ने खुद ऐसे हवाले अपनी आत्मकथा में दे दिए हैं ) ,तो उनकी इस बात के मर्म को समझना मुश्किल नहीं है |उन्होंने लगभग 25 साल के बाद अपनी शादी तोड़ी |जिसे चाहा ,उसका साथ भी नहीं मिला |पर उनमें एक आग थी |समाज की सड़ी -गली रिवायतें न मानने की आग |
पर इसकी कीमत चुकानी पड़ती है |अमृता की आग भी आखिर विस्फोटक होकर उसे ही लील गयी ,और उसका जीवन एक राख बन कर रह गया |पर अमृता हारी नहीं |वह चलती रही |और चलने की निरंतरता ने आखिर उसे इल्मियत (ज्ञान )के महत्त्व से परिचित कराया |उसकी आवाज़ स्वतंत्रता की ,विद्रोह के साहस की आवाज़ बन गयी |अपनी लकीर ,अपनी किस्मत खुद लिखने वाली |
पर्सनली कहूँ तो मुझे इनके विषयों से असहमति हो सकती है ,पर इनका लिटरेरी टेस्ट बहुत बढ़िया है | i really liked her style and taste .
30 -7-15
चन्द्रकिरण सोनेरेक्सा की कहानियां एक चक्र में घूमते लोगों की कहानियां हैं |बचपन ,जवानी ,शादी ,काम -धंधा ,बच्चे ,मरण का चक्र |
इनके पात्र सवाल नहीं करते |अपने यथार्थ को देखते नहीं ,बस ,अनवरत परिस्थितिओं के अनुरूप हिचकोले खाते हुए, बहते चले जाते हैं ;छीजते ,टूटते ,बूढ़े होते ,ख़त्म होते चले जाते हैं |
इनकी कहानियों का सबसे विलक्षण तत्व है -इनकी भाषा |
23-9-15
विमल पाण्डेय की कहानी उत्तर प्रदेश की खिड़की पढ़ी |अच्छी थी |नायक की तीन दुनियाएं है -एक घर की ,एक वर्कप्लेस की ,एक उसके प्यार की |इन दुनियां के कांफ्लिक्ट्स की |फलक बहुत बड़ा रखा है |खासकर राजनीति को जबरदस्ती घुसेड़ा है |हो सकता है ,यह भाव हो कि हमारी दुर्दशा का कारण राजनीति है |भाषा अच्छी थी |satirical ,hilarious ,एकदम समझ में आने वाली |
शीषक खासा व्यंजक बन गया है | उत्तर प्रदेश की झांकी (अर्थात खिड़की )दिखाती एक उम्दा कहानी |
हरे प्रकाश उपाध्याय की नाच पढ़ी |कम शब्दों में एक पर्टिकुलर टाइप के लोगों की पर्टिकुलर टाइप की मानसिकता को अच्छा उकेरा है |