9-10-14
एलिस मुनरो की कहानियाँ पढ़ी |
red dress -शीर्षक का औचित्य तो मुझे समझ नहीं आया |क्योंकि कहानी की सेंट्रल घटना तो वह पार्टी है |खैर ..
मुनरो का कहानी कहने का तरीका काफी अलग है |एक तो अधिकतर फर्स्ट पर्सन नेरैटिव स्टाइल में लिखती हैं तो कहानी की फॉर्म में यकायक चुस्ती आ जाती है |परिवेश ,पात्र ,चरित्र की रुपरेखा की डिटेलिंग पर ज्यादा (शब्द ) खर्च नहीं करना पड़ता |
दुसरे मुनरो का स्टाइल कुछ ज्यादा ही चुस्त है |घटनाओं का ब्यौरा देने ,डिटेल्स के प्रभाव , पर , तुरंत उनसे बाहर आकर एक डिसपैशनेट कमेन्ट करना उनका स्टाइल है |
मार्क ट्वेन की कहानी भाग्य पढ़ी |अच्छी लगी |दोबारा पढूंगी |
30-10-14
आज मुनरो की दूसरी कहानी पढ़ी -पेशन |ठीक थी |उनके यहाँ जब लड़कियां जवानी में ही इंडिपेंडेंट रहती हैं ,तो वे अपनी शादी ,प्यार ,साथी के बारे में स्वयं सोचें ,जाने ,प्रयोग करें ,आगे बढ़ें ;तो इस तरह की कहानियां निकलना unexpected नहीं है |लेकिन अच्छा है ,लेखिका का अपने दिल को जानना और उसे बोल्डली कहने की हिम्मत रखना |कहानी में कनाडा की लाइफ ,डिनर्स ,बुक्स ,गॉसिप्स अच्छे दिखाए हैं |i like munro's style very much .it is very fast ,decision taking .very confident characters ,speaking and knowing one's
mind exactly .
कहानी में नील की मृत्यु हो गयी और मौरी को भी ग्रेस ने रिजेक्ट कर दिया ,पर फिर भी ग्रेस के अकेले हो जाने की चिंता पाठक को नहीं सताती क्योंकि ग्रेस जैसी इंडिपेंडेंट ,thoughtful और searching-true-love- in -her-life -girl के लिए पाठक को विश्वास है कि यह अपना कुछ न कुछ कर ही लेगी |यहाँ ,इंडिया , जैसी बेचारगी का ठप्पा नहीं लगेगा
|इस कहानी में ग्रेस का प्यार को जानना ,नील का केरेक्टर इतना highlighting है कि इसके आगे अंत कुछ लगता ही नहीं |
31-10 -14
इनकी एक और कहानी पढ़ी -deep holes |समझ नहीं आई |जब २-२ ,3-3, शादियाँ आम हो तो उनके बीच क्या इंटिमेसी बचेगी |पर यह सब तो अब इंडिया में भी हो रहा है |
एलिस मुनरो की कहानियाँ पढ़ी |
red dress -शीर्षक का औचित्य तो मुझे समझ नहीं आया |क्योंकि कहानी की सेंट्रल घटना तो वह पार्टी है |खैर ..
मुनरो का कहानी कहने का तरीका काफी अलग है |एक तो अधिकतर फर्स्ट पर्सन नेरैटिव स्टाइल में लिखती हैं तो कहानी की फॉर्म में यकायक चुस्ती आ जाती है |परिवेश ,पात्र ,चरित्र की रुपरेखा की डिटेलिंग पर ज्यादा (शब्द ) खर्च नहीं करना पड़ता |
दुसरे मुनरो का स्टाइल कुछ ज्यादा ही चुस्त है |घटनाओं का ब्यौरा देने ,डिटेल्स के प्रभाव , पर , तुरंत उनसे बाहर आकर एक डिसपैशनेट कमेन्ट करना उनका स्टाइल है |
- she does not take a second to reach to conclusion .
- फिर कहानी का एक एक वाक्य का उपयोग सार्थक बात कहने के लिए करती हैं |as if something is boiling inside her .
- particularly इस कहानी में मुझे वह प्वाइंट सबसे interesting लगा ,जब वह लड़की (नायिका के स्कुल में फ्रेशेर्स पार्टी है ,इसके लिए वह अपनी मां से जिद करके एक लाल ड्रेस बनवा कर पहन कर जाती है ) पार्टी में किसी लड़के के साथ नृत्य कर पाने की इच्छा को रोके खड़ी थी और ऑलमोस्ट सिक फील कर रही थी (क्योंकि कोई भी उस पर ध्यान नहीं दे रहा था ,एक किशोर मन में उठने वाली भावनाओं की तेजी )कि तभी उसे किसी दूसरी लड़की ने बुला लिया और एक अलग जगह जाकर उन्होंने सिगरेट पी और तत्काल वे उस बॉल रूम के प्रभावों के घरे से बाहर आ गए |(इच्छा के भीतर होना और बाहर आना का अद्भुत एग्ज़ाम्प्ल है )
- i guess munro has had been independent right through early age .
- इन्हें भी नोबेल मिला है |और ये देखना कितना दिलचस्प है न , की सर्जनात्मकता की कोई सीमा ,कोई परिभाषा नहीं होती |आसमान जैसी अनंतता में उड़ना भी सर्जनात्मकता है ,और किसी बात की गूढता को हौले से खोलना भी सर्जनात्मकता है |
मार्क ट्वेन की कहानी भाग्य पढ़ी |अच्छी लगी |दोबारा पढूंगी |
30-10-14
आज मुनरो की दूसरी कहानी पढ़ी -पेशन |ठीक थी |उनके यहाँ जब लड़कियां जवानी में ही इंडिपेंडेंट रहती हैं ,तो वे अपनी शादी ,प्यार ,साथी के बारे में स्वयं सोचें ,जाने ,प्रयोग करें ,आगे बढ़ें ;तो इस तरह की कहानियां निकलना unexpected नहीं है |लेकिन अच्छा है ,लेखिका का अपने दिल को जानना और उसे बोल्डली कहने की हिम्मत रखना |कहानी में कनाडा की लाइफ ,डिनर्स ,बुक्स ,गॉसिप्स अच्छे दिखाए हैं |i like munro's style very much .it is very fast ,decision taking .very confident characters ,speaking and knowing one's
mind exactly .
कहानी में नील की मृत्यु हो गयी और मौरी को भी ग्रेस ने रिजेक्ट कर दिया ,पर फिर भी ग्रेस के अकेले हो जाने की चिंता पाठक को नहीं सताती क्योंकि ग्रेस जैसी इंडिपेंडेंट ,thoughtful और searching-true-love- in -her-life -girl के लिए पाठक को विश्वास है कि यह अपना कुछ न कुछ कर ही लेगी |यहाँ ,इंडिया , जैसी बेचारगी का ठप्पा नहीं लगेगा
|इस कहानी में ग्रेस का प्यार को जानना ,नील का केरेक्टर इतना highlighting है कि इसके आगे अंत कुछ लगता ही नहीं |
31-10 -14
इनकी एक और कहानी पढ़ी -deep holes |समझ नहीं आई |जब २-२ ,3-3, शादियाँ आम हो तो उनके बीच क्या इंटिमेसी बचेगी |पर यह सब तो अब इंडिया में भी हो रहा है |
No comments:
Post a Comment