पूरे इंटरव्यू का लिंक ये है -http://www.theparisreview.org/interviews/3196/the-art-of-fiction-no-69-gabriel-garcia-marquez
Q - सत्य और कल्पना में संतुलन बनाने में क्या एक पत्रकार और उपन्यासकार की जिम्मेदारी अलग होती है ?
A - पत्रकारिता में तथ्य की एक चूक आपकी कार्य को पक्षपाती बना देती है। जबकि फिक्शन में एक सही तथ्य पूरे कार्य को वैधता प्रदान करता है। यही अंतर है। एक उपन्यासकार जो चाहे , वो लिखे ;जब तक वह लोगो को अपने लिखे का यकीं दिला सकता है।
Q -आपने लिखने की शुरुआत कैसे की ?
A -ड्राइंग से। मैं कार्टून की ड्राइंग बनाता था। पढ़ना या लिखना शुरू करने से पहले मैं स्कुल में और घर में कॉमिक्स बनाता था। मजेदार बात यह है ,जो मैंने अब जानी ,की हाई स्कुल में मैं लेखक प्रसिद्द था ,जबकि सच यह था कि मैंने कभी कुछ नहीं लिखा था। यदि कभी कोई इश्तहार या अपील लिखनी होती थी तो मुझे यह काम करना होता था क्योकि मैं लेखक समझा जाता था। जब मैं कॉलेज में गया तो मेरे दोस्तों के मुकाबले मेरी साहित्यिक पृष्टभूमि अच्छी थी। बोगोटा विश्वविद्यालय में ,नए लोग मेरे परिचय में आये और दोस्त बने। उनमे से कइयों ने मुझे समकालीन लेखकों से परिचित कराया। एक रात को मेरे दोस्त ने मुझे फ्रेंज काफ्का की लघु कहानियों की किताब दी। मैं अपनी जगह पर गया और मैं the metamorphosis को पढ़ना शुरू किया। पहली लाइन पढ़ते ही मैं लगभग बिस्तर पर से उछल गया। मैं हैरान था। पहली लाइन थी -जैसे ही ग्रेगोर साम्सा अपने अस्थिर सपनो से जागा ,उसने अपने आपको एक बड़े कीड़े के रूप में बिस्पर पर पड़े हुए पाया....... " जब मैंने यह लाइन पढ़ी तो मैंने सोचा मैं तो किसी ऐसे बन्दे को नहीं जानता जिसने इस प्रकार का लेखन निकाला हो ,अगर मैं जानता तो मैं अरसा पहले ही लिखना शुरू कर देता ,तो मैंने तुरंत लघु कहानियां लिखना शुरू कर दिया |वे अब बौद्धिक कहानियां थी क्योंकि वे मेरे साहित्यिक अनुभव के आधार पर लिखी गयी थी और तब तक मिअने साहित्य और जीवन के बीच के लिंक को नहीं पकड़ा था | ये कहानियां बोगोटा के एक अख़बार el espectador के साहित्यिक सप्लीमेंट में छपती थी |उस समय सफल भी हुई थी -शायद इसलिए क्योंकि उस समय कोलंबिया में कोई भी बौद्धिक लघु कहानियां नहीं लिखता था |उस समय अधिकांशतः ग्रामीण और सामाजिक जीवन पर लिखा जाता था |जब मैंने अपनी पहली लघु कहानियां लिखी तो मुझे बताया गया कि उन पर जोयस का प्रभाव है |
Q- क्या आपने उस समय तक जोयस को पढ़ा था ?
a - मैंने जोयस को कभी नहीं पढ़ा था ,तो मैंने ulysses पढना शुरू किया |मैंने स्पैनिश अनुवाद पढ़ा था |बाद में इसका इंग्लिश अनुवाद पढ़ा और पाया स्पैनिश अनुवाद बहुत बुरा था |लेकिन फिर भी इन सबसे मैंने आंतरिक मोनोलॉग की जरुरी टेक्निक सीखी -जो भविष्य में मेरे बहुत काम आई |ये टेक्निक मैंने वर्जिनिया वुल्फ में भी पायी और उनका इस्तेमाल का बेहतर ढंग मुझे ज्यादा पसंद आया |यद्यपि मैंने बाद में पाया कि यह टेक्निक तो किसी lazarillo de tormes के अनाम लेखक की इजाद है | (मार्केज़ के वाक्य बहूऊऊऊऊऊऊऊऊऊउत बड़े बड़े होते हैं ) ..........contd
Q- क्या आपने उस समय तक जोयस को पढ़ा था ?
a - मैंने जोयस को कभी नहीं पढ़ा था ,तो मैंने ulysses पढना शुरू किया |मैंने स्पैनिश अनुवाद पढ़ा था |बाद में इसका इंग्लिश अनुवाद पढ़ा और पाया स्पैनिश अनुवाद बहुत बुरा था |लेकिन फिर भी इन सबसे मैंने आंतरिक मोनोलॉग की जरुरी टेक्निक सीखी -जो भविष्य में मेरे बहुत काम आई |ये टेक्निक मैंने वर्जिनिया वुल्फ में भी पायी और उनका इस्तेमाल का बेहतर ढंग मुझे ज्यादा पसंद आया |यद्यपि मैंने बाद में पाया कि यह टेक्निक तो किसी lazarillo de tormes के अनाम लेखक की इजाद है | (मार्केज़ के वाक्य बहूऊऊऊऊऊऊऊऊऊउत बड़े बड़े होते हैं ) ..........contd
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