४-९-१४
मार्केज की दो कहानियां पढ़ी।
मार्केज की दो कहानियां पढ़ी।
१ दुनिया के सबसे सुन्दर आदमी का डूबना -अच्छी थी। in fact I really liked it .समुद्री किनारे बसे एक गाँवमे एक अपरिचित सुन्दर लाश के जरिये मनुष्यों पर सौन्दर्य ,शक्ति ,बनावट के प्रभाव (गहरे प्रभाव ) को मार्केज ने सादगी से कहा है। इनके कहने का ढंग बिलकुल सादा है। तरल। औरतों ,आदमियों,बच्चों की मानसिकता में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। फिर भी कहानी पर अपनी पकड़ नहीं छोड़ते। इनकी कहानियों में समुद्र बहुत ज्यादा है। समुद्र संबंधी ओब्सेर्वेशन्स अच्छी हैं। एक शांत ,ठहरी हुई मगर सजग गतिमान मानसिकता के द्वारा रची गयी कहानियां।
२ ऐसे ही एक दिन - इस कहानी में गाँव के लोगों की सहज विश्वासी प्रकृति के परिप्रेक्ष्य में मिथकों के भय के प्रभाव को दिखाया है। यह कहानी मुझे इसलिए पसंद आयी कि किस प्रकार लोगों में अज्ञात के प्रति भय का एक स्वाभाविक अंश होता है। और उनके सारे क्रियाकलाप इस प्रवृति से संचालित होते हैं।
इस सन्दर्भ में एक पर्सनल बात याद आ गयी। मेरे जन्म के अवसर पर छेदी वाले बाम्हन ने कहा की यह माँ की नहीं सुनेगी। यह बात मेरी मम्मी ने इस हद तक अपने दिल में बिठा ली कि फिर खुद अपनी आँखों से देखना ही छोड़ दिया। फिर इस मिथ्या विश्वास की बुनियाद पर उनका व्यवहार मेरे प्रति रुखा होता चला गया। प्रत्युत्तर में मैं भी विरोधी होती चली गयी ,तो आख़िरकार वही बात सच होकर रही। अन्यथा क्या वे कभी देख पायीं कि मैंने उन्हें जितना obey किया उतना किसी ने भी नहीं किया। पर चेतन - अवचेतन में मिथकों ,अज्ञात भयों की सत्ता इतनी गहरी होती है कि इंसान खुद अपनी आँखों से देखना भूल जाते हैं।
यह तो है की मानव सत्ता का एक हिस्सा अज्ञात ही रहता है। धर्म का मानवों पर इस बुरे असर को ,जब मैं सोचती हूँ तो सोच में पड जाती हूँ। पर कोई चारा नहीं। अलप सत्व वाले वाले मनुष्यों पर यह होगा ,कोई निदान नहीहै।
No comments:
Post a Comment