मार्केज थोड़ा लंबे चलेंगे। इन्हें अब निबटा ही लेते हैं।
इन पर एक टिपण्णी १५-१०-१५ की है। पर उससे पहले कुछ बातें।
फ्योदोर के उपन्यास वाली टिपण्णी में मैंने बंद कहानी की बात कही थी। मार्केज की कहानियाँ मुझे खुली कहानियां लगीं।
बंद -खुली से मेरा क्या मतलब है ,सुनो।
एक कहानी को पढ़ते हुए यह अंदाज तो लग ही जाता है की इसमें कहानीकार कहाँ छुपा बैठा है अर्थात सीधे शब्दों में कहूँ तो कि कहानीकार को उस कहानी का पता कैसे चला। वह स्वयं इस कहानी का भोक्ता है ,या वह साक्षी है। दोनों प्रकार की कहानियां बंद कहानिया है ,क्योंकि ऐसी कहानियों में लेखकों के निजी नजरिये ,अनुभव ,सुख-दुःख ,कमेंट्स गहनता से उभर कर आते हैं। इस प्रकार की कहानियों का प्रभाव गहन (हैवी )होता है। अब तक इस ब्लॉग में मैंने जितनी भी टिपण्णी लिखी ,उनमे हैवी वर्ड सबसे ज्यादा यूज़ किया होगा। इस तरह की कहानियों ऐसा प्रभाव इसलिए पैदा कर पाती हैं ,क्योकि यह या तो लेखक की स्वयं की आपबीती है या यह ऐसे इंसान की बात है जिससे वह अटैच है। इसलिए तीव्र भावोद्वेलन ऐसी कहानियों की विशेषता होती है।
खुली कहानियों में कहानीकार (मसलन मार्केज की कहानियों में ,हम आगे देखेंगे ) मात्र द्रष्टा है। वह मुख्य पात्र से अटैच नहीं है। मुख्य पात्र के जीवन में जो कुछ भी घटता है ,अच्छा या बुरा ,इससे वह ज़रा भी प्रभावित नहीं।
फिर उसे उस कहानी का पता कैसे चला ?
क्योंकि उसका पेशा ऐसा है , वह पत्रकार है ,की वह अलग अलग तरह के लोगों के संपर्क में आता है। उसे आना पड़ता है।
अपने संपर्क में आये लोगों की कहानियों का सेलेक्शन वह दिलचस्पी के आधार पर करता है ,की इस कहानी में ऐसी क्या खास बात है कि इसे कहा जाए।
किरदार की दिलचस्पी उसे कहानी कहने के लिए प्रेरित करती है।
मगर इन सबके साथ उसका अपना जीवन भी है ,जो वह जी रहा है। यात्राएं करना ,यात्राओं के ब्यौरे ,होटलों के मेन्यू ,बार गर्ल्स के साथ छेड़छाड़ ,विभिन्न जगहों के प्रामाणिक ब्यौरे ,लोगो के व्यव्हार के सटीक आकलन करना ,विभिन्न प्रकार
की व्यवस्थाओं की बारीक़ समझ -अर्थात कुल मिला एक पत्रकार के पेशे की अनुभवगत पूंजी ,भी मार्केज ने अपनी कहानियों कहानियों में उड़ेल दी है। contd
इन पर एक टिपण्णी १५-१०-१५ की है। पर उससे पहले कुछ बातें।
फ्योदोर के उपन्यास वाली टिपण्णी में मैंने बंद कहानी की बात कही थी। मार्केज की कहानियाँ मुझे खुली कहानियां लगीं।
बंद -खुली से मेरा क्या मतलब है ,सुनो।
एक कहानी को पढ़ते हुए यह अंदाज तो लग ही जाता है की इसमें कहानीकार कहाँ छुपा बैठा है अर्थात सीधे शब्दों में कहूँ तो कि कहानीकार को उस कहानी का पता कैसे चला। वह स्वयं इस कहानी का भोक्ता है ,या वह साक्षी है। दोनों प्रकार की कहानियां बंद कहानिया है ,क्योंकि ऐसी कहानियों में लेखकों के निजी नजरिये ,अनुभव ,सुख-दुःख ,कमेंट्स गहनता से उभर कर आते हैं। इस प्रकार की कहानियों का प्रभाव गहन (हैवी )होता है। अब तक इस ब्लॉग में मैंने जितनी भी टिपण्णी लिखी ,उनमे हैवी वर्ड सबसे ज्यादा यूज़ किया होगा। इस तरह की कहानियों ऐसा प्रभाव इसलिए पैदा कर पाती हैं ,क्योकि यह या तो लेखक की स्वयं की आपबीती है या यह ऐसे इंसान की बात है जिससे वह अटैच है। इसलिए तीव्र भावोद्वेलन ऐसी कहानियों की विशेषता होती है।
खुली कहानियों में कहानीकार (मसलन मार्केज की कहानियों में ,हम आगे देखेंगे ) मात्र द्रष्टा है। वह मुख्य पात्र से अटैच नहीं है। मुख्य पात्र के जीवन में जो कुछ भी घटता है ,अच्छा या बुरा ,इससे वह ज़रा भी प्रभावित नहीं।
फिर उसे उस कहानी का पता कैसे चला ?
क्योंकि उसका पेशा ऐसा है , वह पत्रकार है ,की वह अलग अलग तरह के लोगों के संपर्क में आता है। उसे आना पड़ता है।
अपने संपर्क में आये लोगों की कहानियों का सेलेक्शन वह दिलचस्पी के आधार पर करता है ,की इस कहानी में ऐसी क्या खास बात है कि इसे कहा जाए।
किरदार की दिलचस्पी उसे कहानी कहने के लिए प्रेरित करती है।
मगर इन सबके साथ उसका अपना जीवन भी है ,जो वह जी रहा है। यात्राएं करना ,यात्राओं के ब्यौरे ,होटलों के मेन्यू ,बार गर्ल्स के साथ छेड़छाड़ ,विभिन्न जगहों के प्रामाणिक ब्यौरे ,लोगो के व्यव्हार के सटीक आकलन करना ,विभिन्न प्रकार
की व्यवस्थाओं की बारीक़ समझ -अर्थात कुल मिला एक पत्रकार के पेशे की अनुभवगत पूंजी ,भी मार्केज ने अपनी कहानियों कहानियों में उड़ेल दी है। contd
No comments:
Post a Comment