Friday, August 12, 2016

note

बेटे का बर्थडे तो हुआ ,पर फंक्शन नहीं। अस्तु
चलो काम शुरू करते हैं। 
इस ब्लॉग के साथ मेरा एक ब्लॉग और भी है ,इल्ली। आगे उस ब्लॉग पर भी मैटर  शेयर करुँगी।
कहानीनामा पर प्रोफेशनल मैटर और इल्ली पर पर्सनल -प्रोफेशनल।
इल्ली -यह नाम मैंने इस ब्लॉग  इसलिए रखा ,क्योंकि यह नाम मुझे सबसे ज्यादा डिफाइन करता है। इल्ली कहतें हैं ,कैटरपिल्लर को। एक कीड़ा जो अपनी खोल में पड़ा पड़ा दुनिया भर की चीजें  खाता रहता है -सेब ,पत्ते ,कीड़े ,कुछ भी। मैं भी ऐसी ही थी। अपनी सुरक्षित हद की जिंदगी में जो भी विचार ,अनुभव मिला , खा लिया।
फिर एक वक्त्त  ऐसा भी आया की मुझे लगा ,अब मैं अपनी खोल से बाहर आकर दुनिया को अपने रंग-बिरंगे पंख दिखाऊँ  ,पर हिंदी में तितली शब्द के साथ सामाजिक रूप से अति गतिशील महिलाओं की अर्थछाया जुडी है ,जो की मुझे पसंद नहीं है। इसलिए इल्ली को मैंने इल्ली ही रहने दिया। वैसे यह इल्ली तितली से भी ज्यादा रंग-बिरंगी है (होप सो ). 

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