२४-११-१३
७ भागो में से ६ पढ़ लिए हैं |समापन पहले पढ़ लिया है |उपन्यास में २ दर्दनाक मौतें हो चुकी हैं |एक क्लर्क की ,दूसरी उसकी पत्नी कटरीना की |रोद्या की माँ समापन में मरी |वैसी ही दर्दनाक ,निराशापूर्ण |
७ भागो में से ६ पढ़ लिए हैं |समापन पहले पढ़ लिया है |उपन्यास में २ दर्दनाक मौतें हो चुकी हैं |एक क्लर्क की ,दूसरी उसकी पत्नी कटरीना की |रोद्या की माँ समापन में मरी |वैसी ही दर्दनाक ,निराशापूर्ण |
- कटरीना और उसकी मालकिन की rivarly अच्छी दिखाई गयी है |सचमुच एक दूसरे के पंजों में फंसी औरतें ऐसे ही बिहेव करती हैं |
- क्लर्क की नौकरी छूटी तो वह शराब क्यों पीने लगा ? (अनास्था ,अपने स्वयं के जीवन उद्देश्य के प्रति किंकर्तव्यविमूढ़ता लोगों को ऐसा ही बना देती है |
- प्योत्र पेत्रोविच के रूप में धनी वर्ग के अहंकार ,दंभ ,मक्कारी का चित्र खींचना दोस का highlight पॉइंट है |ऐसी एक कहानी भी पढ़ी थी |
- क्या कारन है की प्रेमचंद की तरह दोस ने भी गरीब ,वंचित कमजोर और सामाजिक रूप से कुचले हुओं को सच्चा मानवीय ,नेकदिल,रहमदिल,संवेदनशील दिखाया है |चाहे रोद्या हो ,उसकी माँ हो ,बहन हो या सोन्या हो |क्या कुचले हुए लोगों की संवेदना 'प्रबल' हो जाती है ?what is the science behind it ? उपन्यास का tension -point बहुत high रखा गया है और इसकी कसावट कहीं भी ढीली नहीं पड़ी है |
- ५वे भाग में रोद्या ने सोन्या के आगे वे कारण कहे ,जिनके वशीभूत होकर उसने बुढीया को मारा |इनमे सबसे प्रबलतम कारण यह था कि वह खुद को यह साबित करना चाहता था कि वह जूँ नहीं है ;साधारण नहीं है | असाधारण है |अर्थात वह अपनी शक्तियों की आजमाइश (बुद्धि ,साहस ,जोखिम उठाने की क्षमता )करना चाहता था | दूसरे वह तार्किक रूप से इस बात से संतुष्ट हो चुका था कि उसकी स्थिति को ऊपर उठाने का भार स्वयं उसके ऊपर है ,ईश्वर पर नहीं |अर्थात ईश्वर पर अनास्था ने रोद्या को इतना दुस्साहसी बनाया |इसी कारण वह बुढ़िया की हत्या को तार्किक रूप से सही साबित कर सका |उसे सोन्या,कटरीना,अपनी मांऔर बहन जैसी निष्क्रिय आस्थावादी औरतों से गहरी चिढ और नफरत है ,जो केवल अप्रतिरोधी सहनशक्ति के कारण दूसरों के लिए सतत दुःख का स्रोत हैं |
- फिर रोद्या नाकाम क्यों हुआ ?ठीक यही प्रश्न वह अपने आप से पूछता है और इस नतीजे पर पहुँचता है कि वह 'कायर 'था |मैं भी यही मानती हूँ या कह लीजिये हत्या आखिर जुर्म है और ईश्वर के इस कानून के खिलाफ जाने की हिम्मत लेखक में भी नहीं ,चाहे वह खुद ईश्वर को न मानता हो |
- रोद्या की अनास्था क्लर्क की अनास्था से भिन्न है |
- नरेश नदीम ने अनुवाद अच्छा किया है |.....contd
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