इसके बाद याद आयी -सुधा अरोरा की 'एक औरत -तीन बटा चार ' ,प्रेमचंद की 'सवा सेर गेंहू ' इत्यादि कहानियां |
ये वे कहानियां थी ,जिन्हें मैंने एक किसी दिन, कहानी के कहानीपन पर विचार करते हुए यादों के कुएं से निकाला था या यह कहना जयादा सही होगा की पानी को छेड़ने पर ये कहानियां अपने आप सतह पर आ गयी थी |ये वे कहानियां थी जिन्हें मैं इग्नोर नहीं कर सकती थी /हूँ , न आज और न कभी कल |क्यों ?इस बारे में बाद में बात करेंगे |
अब चलते है डायरी में लिखी तारीखवार एंट्रीज़ की ओर -कि जबसे मैंने पढे हुए पर टिपण्णी लिखना शुरू किया |
इससे पहले की एक टिपण्णी २४-१० -१३ की भी है पर वह मैं स्किप कर रही हूँ |
क्यों ?
मेरी मर्जी |
७-११-१३
मैत्रेयी पुष्पा की कहानी पढ़ी 'गोमा हंसती है ' |ग्रामीण परिवेश है |साधारण से पात्र |कथ्य भी कुछ नहीं |पर कथनोपकथन (पात्रों के संवाद )विश्वसनीय है | गालियों का प्रयोग विश्वसनीय है |भाषा ठीक है |बाकी ................|साधारण वातावरण ओर साधारण स्थितियों में जन्मे पात्रों के जीवन लक्ष्य कितने साधारण होते है ,यह इस कहानी में देखा जा सकता है |
क्या बात है कि गोमा को किसी का डर नहीं है ?लोकोपवाद का ,घर टूटने का |
१६-११ -१३
(फ्योदोर दोस्तोव्यस्की - बड़ी जल्दी आ गए है |खैर ...
शुरू करने से पहले बता दूँ की इनकी कहानियों की एक किताब मैंने पहले भी पढ़ी थी |शायद 2010 या ११ में |पर उस समय मैं पढ़ती थी |पढ़ कर लिखती नहीं थी |इसलिए उन कहानियों का ब्योरेवार विश्लेषण तो मैं नहीं दे सकती ,पर स्मृति के आधार पर यह जरुर कह सकती हूँ कि उस समय भी मैं इनके लेखन से प्रभावित हुई थी |इनका लेखन हैवी जरुर है ,पर इनके भीतर लेखकीय ईमानदारी बहुत है ,जो इनकी ओर आकर्षित करती है |फॉर एग्जाम्पल - पढने /लिखने का आनंद जीवन के अन्य सजीव आनद (बच्चे को खिलाना ,या मित्र से बतियाना ) से किस्मी तौर पर अलग है इसकी विवेचना शायद फ्योदोर ने ही की है |अन्यथा लेखको की प्रजाति आत्ममुग्ध लोगो की प्रजाति होती है |दो अक्षर पढ़कर ये लोग खुदा के भी काबू के बाहर हो जाते है |
उस संकलन में कई कहानिया थी जो अच्छी लगी थी |क्लासिक लेखन जिसे कहते है ,वह इनकी हरेक रचना में दिखता है |
एक कहानी थी (मैं अपने आप को कहने से रोक नहीं पा रही हूँ )
उसमे आभिजात्य वर्ग के उस पात्र की जैसी दुर्गति दिखाई है ,वह एक एग्जामपल ही है |एक कहानी को शुरू करने से पहले उन्होंने कहानी की टेक्निक के बारे में लिखा है |'सिल्वरी नाइट्स ' कहानी के वातावरण की प्रभावोत्पादकता बेहतरीन है |खैर .... )
ये वे कहानियां थी ,जिन्हें मैंने एक किसी दिन, कहानी के कहानीपन पर विचार करते हुए यादों के कुएं से निकाला था या यह कहना जयादा सही होगा की पानी को छेड़ने पर ये कहानियां अपने आप सतह पर आ गयी थी |ये वे कहानियां थी जिन्हें मैं इग्नोर नहीं कर सकती थी /हूँ , न आज और न कभी कल |क्यों ?इस बारे में बाद में बात करेंगे |
अब चलते है डायरी में लिखी तारीखवार एंट्रीज़ की ओर -कि जबसे मैंने पढे हुए पर टिपण्णी लिखना शुरू किया |
इससे पहले की एक टिपण्णी २४-१० -१३ की भी है पर वह मैं स्किप कर रही हूँ |
क्यों ?
मेरी मर्जी |
७-११-१३
मैत्रेयी पुष्पा की कहानी पढ़ी 'गोमा हंसती है ' |ग्रामीण परिवेश है |साधारण से पात्र |कथ्य भी कुछ नहीं |पर कथनोपकथन (पात्रों के संवाद )विश्वसनीय है | गालियों का प्रयोग विश्वसनीय है |भाषा ठीक है |बाकी ................|साधारण वातावरण ओर साधारण स्थितियों में जन्मे पात्रों के जीवन लक्ष्य कितने साधारण होते है ,यह इस कहानी में देखा जा सकता है |
क्या बात है कि गोमा को किसी का डर नहीं है ?लोकोपवाद का ,घर टूटने का |
१६-११ -१३
(फ्योदोर दोस्तोव्यस्की - बड़ी जल्दी आ गए है |खैर ...
शुरू करने से पहले बता दूँ की इनकी कहानियों की एक किताब मैंने पहले भी पढ़ी थी |शायद 2010 या ११ में |पर उस समय मैं पढ़ती थी |पढ़ कर लिखती नहीं थी |इसलिए उन कहानियों का ब्योरेवार विश्लेषण तो मैं नहीं दे सकती ,पर स्मृति के आधार पर यह जरुर कह सकती हूँ कि उस समय भी मैं इनके लेखन से प्रभावित हुई थी |इनका लेखन हैवी जरुर है ,पर इनके भीतर लेखकीय ईमानदारी बहुत है ,जो इनकी ओर आकर्षित करती है |फॉर एग्जाम्पल - पढने /लिखने का आनंद जीवन के अन्य सजीव आनद (बच्चे को खिलाना ,या मित्र से बतियाना ) से किस्मी तौर पर अलग है इसकी विवेचना शायद फ्योदोर ने ही की है |अन्यथा लेखको की प्रजाति आत्ममुग्ध लोगो की प्रजाति होती है |दो अक्षर पढ़कर ये लोग खुदा के भी काबू के बाहर हो जाते है |
उस संकलन में कई कहानिया थी जो अच्छी लगी थी |क्लासिक लेखन जिसे कहते है ,वह इनकी हरेक रचना में दिखता है |
एक कहानी थी (मैं अपने आप को कहने से रोक नहीं पा रही हूँ )
उसमे आभिजात्य वर्ग के उस पात्र की जैसी दुर्गति दिखाई है ,वह एक एग्जामपल ही है |एक कहानी को शुरू करने से पहले उन्होंने कहानी की टेक्निक के बारे में लिखा है |'सिल्वरी नाइट्स ' कहानी के वातावरण की प्रभावोत्पादकता बेहतरीन है |खैर .... )
No comments:
Post a Comment