Saturday, July 9, 2016

अपराध और दंड

१६ -११ -१३
फ्योदोर दोस्तोव्यस्की का उपन्यास शुरू किया है 'अपराध और दंड '| ऑनलाइन(hindisamay.com)  | दूसरा भाग चल रहा है |रोद्या  ने बुढ़िया और उसकी बहन  को मार दिया है | आलोचनात्मक यथार्थपूर्ण वर्णन पढने का मज़ा ही कुछ और है |जगह जगह रोद्या  की मनस्थिति ,उसके क्रियाकलापों के सूक्ष्म ब्योरे ,घटनाओं की तार्किकता ,आकस्मिकता तथा सबसे बढ़कर पात्रों की व्यक्तिगत विशेषता को पहचानती अचूक दृष्टि ने मजबूर कर दिया है की एक- एक शब्द ध्यान  से पढूं |उसकी गहराई तक जाकर पढूं |may be जितनी  गहराई में डूबकर लिखा गया है |
रोद्या (मुख्य किरदार ) का अकेलापन ,खालीपन ,बेतरतीबी  ,संवेदनाओं का विश्लेषण अद्भुत है |फिर भी मैं इन सब से किंचित दुरी पर रहना manage कर लेती हूँ क्योकि मेरी परवरिश ,शिक्षा अलग वातावरण में हुए हैं -भारतीय  वातावरण में हुए हैं| और  यह जानना दिलचस्प है (चाहे किताबो के जरिये ही सही )कि कैसे होते हैं वे लोग जो भारतीय नहीं होते |
२०  -११- १३

  • तीसरा भाग चल रहा है |अब कुछ interest बनने लगा है |ठंडे ,शांतचित से बैठकर लिखना किसे कहते हैं ,यह कोई देखे |power of observance
  • russia में भी दो नामों का चलन है |प्रत्येक पात्र के दो नाम है  |
  • रोद्या के अकेलेपन की वजह उसका असफल प्रेम भी है |
  • रोद्य की बहन का गरिमापूर्ण वर्णन |इंडिया के कंगाल तो ऐसे नहीं देखे -may be -मेरा अनुभव ही क्या है ?-शायद education का असर हो -शायद इसीलिए वहां लाल क्रांति संभव हुई |
एक बात और -आकस्मिकता अर्थात घटना की घटिती किसी भी कहानी में सहेतुक होती है ;पर इसे मान लेने के कारण दोस में यह सहेतुक होते हुए भी संयोग लगती है जबकि प्रेमचंद में 'कलात्मक कारीगिरी '|फॉर एग्जाम्पल -रोद्य का लिजावेता को यह कहते सुनना कि उस रात बुधिया अकेली रहेगी |इस बात के संयोग को दोस ने घुमावदार भाषा में कहकर पठाक के मन में जमा दिया है |पर may be ,यह वह  बिंदु है जब रचना अपने रचना क्षेत्र से बाहर आकर यथार्थ जीवन क्षेत्र में प्रविष्ट होने का दावा करती है |एक ऐसा बिंदु जिसके भीतर रहता हुआ पाठक  सहसा खुले सिरे की ओर देखकर पल भर के लिए सचेत होता है |क्योकि क्या आखिर सचमुच का जीवन ऐसे संयोगो से रहित होता है ?क्या एक बिंदु पर आकर हम सब destiny में विश्वास नहीं करने लगते ?(यहाँ हम देखे कि क्लासिक होना क्या होता है )
२१-११-१३
चौथे भाग पर पहुच गयी |उफ़ !!!!!! रोद्या  का तनाव (क्या लेखक ने भी यही तनाव नहीं झेला होगा )

  • सपनो का कलात्मक उपयोग किया है | अब तक 3-4 बड़े सपने आ चुके हैं \एक घोड़ी वाला ,एक रोद्य के जन्म स्थान के परिवेश को दिखाता है ,तीसरा क़त्ल करने से पहले नदी के किनारे ,चौथा एक आदमी उसे हत्यारा बुला रहा है 
  • रोद्य गहन बुद्धिमान तथा विचारशील है |संवेदनशील भी |
  • रोद्य के अतिबुधिमान चरित्र के आगे रजुमिखिंन के साधारण पात्र की योजना पाठकों को अति गंभीरता के अटैक के बचने के लिए की गयी लगती है |
  •  रजुमिखिन को देखते ही मैं समझ गयी थी कि इसका टांका अ०दोत्या के साथ जुड़ेगा (सरसता की योजना )
  • देखें जिस खुले सिरे की बात आई है क्या वह  अंत में कहीं जाकर खुलेगा भी या एक अति कुशल पुरुष लेखक की दिमागी ऐयाशी निकलेगी जो पाठकों को अपनी मेधा ,प्रतिभा से चकित ,थकित ,आतंकित कर देना चाहता है | .............contd 

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