Monday, July 18, 2016

कहानीपन -7

8-8-14
आज गोरा ख़त्म कर लिया |गोरा का जैसा चरित्र शुरू किया था ,वैसा अंत नहीं किया |उसके क्रिस्तान होने के रहस्य को ही एकमात्र विस्फोटक कारण बताकर उसके पूर्व अर्जित व्यक्तित्व को इस प्रकार उडा देना 'अकुशल ' लगा |
अच्छे उपन्यास के तत्व -दोस और रवीन्द्रनाथ के दोनों नावेल्स को कम्पेयर करके ये बातें निकाली |

  1. मुख्य पात्र अक्सर बौद्धिक ही रखते है | |एक गौण पात्र साथ में लगा देते हैं |पर गोरा में विनय का पात्र ऐसा गौण भी नहीं है |
  2. नायिका का अतीव कोमल और अक्सर नायक के समकक्ष होना -सुन्दरता ,कोमलता,बुद्धि की तीक्षणता ,धैर्य ,तनुता ,पैने नक्श (अर्थात जिस समय सौन्दर्य के जैसे मानक स्थापित होते हैं ,उनमे से चुन चुन कर गुणों को नायक-नायिका में आरोपित करना )
  • एक ओर सुचरिता हिंदुत्व में ढली जा रही है ,दूसरी और गोरा खुद ब्रह्म बनने चल  पड़ा है|
  • आनंदमयी का चरित्र ठीक था |
  • हरिमोहिनी के चरित्र के उतार चढाव अधिक विश्वसनीय थे |
  • कैलाश का इमारत का निरीक्षण elizabeth का darsy के country side villa के  निरीक्षण जैसा लगा |
  • रवीन्द्र का पक्ष समझ नहीं आया |गोरा के चरित्र में हिंदुत्व की ऐसी गौरवमयी वीर्यवान छवि प्रतिष्ठित करके फिर उसी ढुलमुलपन की और झुक पड़ना  ;क्या है ? (अगर धर्म के स्वयंसेवक इस तरह नारी के मोह में विचलित होकर फिसलते गए तो धर्म रक्षक सेना का क्या होगा ? )
  • प्रकृति का पक्ष इनका बहुत स्ट्रोंग है |लगता है वर्षा ऋतु कवि  की प्रिय ऋतु है |राजर्षि की शुरुआत भी वहीँ से की है |
१४-८-१४
 राजर्षि शुरू किया था |अच्छा चल रहा है |बालकों के साथ राजा की क्रीडा के दृश्य अतिरंजित से हैं पर उस समय के (और वह भी भावुक हृदय बंगालियों के लिए ) पाठकों की मनोवृत्ति के अनुकूल हैं |

  • रस जगाने में कवि की प्रतिभा कुछ ज्यादा ही निखरती है |
  • प्रकृति निरीक्षण तथा उससे भी अधिक प्रकृति से उत्पन्न अन्तःप्रेरणा के दृश्य अद्भुत हैं |
  • प्रेमचंद को कठोर कहा जाता है |पात्रों को मनचाही दिशा में घुमाने में रवीन्द्र भी कम नहीं |
  • त्रिपुरा के राजा का इस तरह बिलकुल ही impractical दिखाना सही नहीं लगा |
  • भाषा तत्सम ,गंभीर ,शिष्ट हास्य परिनिष्ठित है |शिक्षित बंगाली रूचि के अनुकूल |
  • रसोत्पादक क्षमता  अच्छी है |
  • हिंदुत्व का प्रश्न, लगता है ,इनके लेखन का केन्द्रीय विषय है |

1 comment:

  1. viewers
    pls be kind enough to comment .
    i invite a rich and healthy discussion .

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